जिले में शिक्षा विभाग के लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी ? गरीब अभिभावक कहां पढ़ाए अपने बच्चों को ? निजी स्कूलों की फीस बढ़ती चली जा रही है सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था बदहाल ।

शाहिद जैनब 

झाबुआ - पुलिस अधीक्षक को हटाने के बाद अब जिला कलेक्टर का भी तबादला हो गया है , अब सवाल यही उठा रहा है की जिले की शिक्षा व्यवस्था मैं सुधार के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को क्यों नहीं बदला जा रहा है ? जब की जिले में शिक्षा विभाग में कई घोटाले सामने आते हैं, कई भ्रष्टाचार की पोल खुलती है लेकिन कार्यवाही नाम मात्र की होती है। कभी फर्जी छात्र परीक्षा देते हुए पकड़ा ते हैं । कभी शिक्षक विद्यालय में जाते ही नहीं और वेतन पा लेते हैं ।  ज्यादातर शिक्षा विभाग के अधिकारी एक से ज्यादा पदों पर सांप की तरह कुंडली मारकर बैठे हुए नजर आते हैं । 
जिले में शिक्षा का स्तर दिन-ब-दिन बद से बदतर होता चला जा रहा है । जिले की कई स्कूलों में स्थाई शिक्षक नहीं है । अतिथि शिक्षक ही स्कूलों को संभाल रहे । कहीं शिक्षक है तो वो शिक्षक समय पर नहीं आ रहे हैं । कई बार स्कूलों पर ताले देखने को मिल रहे हैं । मध्यान भोजन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता हुआ नजर आता है । जिले में बच्चो का मध्यान भोजन नियमानुसार नही दिया जा रहा है । जिले की कई माध्यमिक विद्यालय में शौचालय नहीं है । शासकीय विद्यालयों में नल जल योजना से लगे पानी की टंकियां व नल कनेक्शन सिर्फ नल में जल नहीं योजना के रूप में दिखाई दे रहे हैं । निजी स्कूलों में लगातार  स्कूल फीस में वृद्धि होती चली जा रही है और शासकीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। 
गरीब अभिभावकों के लिए निजी स्कूलों में बच्चों को शिक्षा दिलाना मुश्किल हो रहा है तो शासकीय विद्यालयों में शिक्षा का स्तर गिरता चला जा रहा है । 
झाबुआ जिला की नई कलेक्टर जिले की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की ओर ध्यान दे तो सर्व प्रथम शिक्षा विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों पर में कारवाही करना पड़ेगी । 

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